नेत्र – ज्योतिवर्धक (चश्मा छुड़ानें के लिए) उपचार, उपाय और विकल्प –
बादाम-गिरी, सौंफ़ (बड़ी) स्वच्छ की हुई, मिश्री कूजा तीनों को बराबर-बराबर लेकर कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर किसी काँच के बर्तन में रख लें। प्रतिदिन रात में सोते समय 10 ग्राम की मात्रा में 250 ग्राम दूध के साथ चालीस दिन तक निरन्तर लेते रहनें से दृष्टि इतनी तेज़ हो जाती है कि चश्में की आवश्यकता ही नहीं रहती। इसके अतिरिक्त इससे दिमाग़ी कमज़ोरी, दिमाग की गर्मी, दिमाग़ी फ़ितूर और बातों को भूल जानें की बिमारी भी दूर हो जाती है।
विशेष –
बच्चों को आधी मात्रा दें। पूर्ण लाभ के लिए दवा के सेवन के दो घंटे बाद तक पानी न पियें। आँखों की रौशनी के साथ-साथ याद्दाश्त भी बढ़ेगी।
कूजा मिश्री न मिले तो साधारण मिश्री का प्रयोग भी कर सकते हैं। कूजा मिश्री मिट्टी के बर्तन या कूजे की सहायता से एक विशेष विधि से बनाई जाती है। यह अधिक शीतल मानी जाती है।
सहायक उपचार –
सुबह उठते ही मुँह में ठंडा पानी भरकर मुँह फुलाकर ठन्डे पानी से आँखों पर छींटे लगाने चाहिए। ऐसा दिन में तीन बार करें।
त्रिफला जल से आँखें धोना – आँवला, हरड़ और बहेड़ा (गुठली सहित) सामान मात्रा में लेकर उन्हें यवकूट (थोड़ा-सा कूटकर) कर लें और किसी शीशी में भरकर रखकर रख लें। प्रतिदिन शाम को इसमें से 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण को कोरे मिट्टी या शीशे के पात्र में एक गिलास पानी (200 ग्राम) में भिगो दें। सुबह इसको मसलकर छान लें। फ़िर इसके निथरे हुए पानी से हल्के हाथ से नेत्रों में खूब छींटे लगाकर धो लिया करे। इससे न केवल आँखों की रौशनी की रक्षा की जाती है बल्कि नज़र तेज़ होती है तथा आँखों की अनेक बीमारियाँ ठीक होती है।
पैर के तलवों में सरसों के तेल की प्रतिदिन मालिश करने और नहाने से पहले पैर के अंगूठे तेल से तर करने से नेत्र-ज्योति बढ़ती है तथा आँखों के रोग नहीं होने पाते।
गाजर, टमाटर का सेवन करें। दिन में दो बार आधा गिलास की मात्रा में गाजर का रस दो-तीन महीनों तक पीए।
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