30.1.16

नीम का तेल कई मामले में बालों के लिए है फायदेमंद


नीम का तेल कई मामले में बालों के लिए है फायदेमंद

बाल झड़ने, डैंड्रफ जैसी समस्याओं से परेशान हैं तो नीम के तेल के इस्तेमाल से आपको फायदा मिल सकता है।
आयुर्वेद से लेकर एलोपैथ तक, नीम की जड़ से लेकर तने, छाल,पत्तियों, फल और तेल, नीम का सबकुछ फायदेमंद है।नीम के हैं ये गुण
नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल, एंटी पैरासिटिक गुणों के अलावा, विटामिन सी, प्रोटीन और कैरोटीन प्रचुर मात्रा में है जो न केवल बालों को संक्रमण से मुक्त रखता है और जुएं जैसी समस्याओं से बचाता है बल्कि बालों को लंबे समय तक घना और काला बनाए रखने में मदद करता है।ऐसे करें इस्तेमाल
नीम का तेल लगाने का सही तरीका इस तरह है। पहले नीं के तेल को हल्का गर्म कर लें।
इससे स्काल्प की मसाज करें। इससे कम से कम एक घंटा और अधिकतम रात भर लगाकर छोड़ें।
इसके बाद शैंपू से बाल अच्छी तरह साफ करें। हफ्ते में कम से कम एक बार यह उपाय करें।

आकडे (आक या मदार ) के ये है फायदे..... !

आकडे (आक या मदार ) के ये है फायदे..... !

* सर्व सुलभ है ये पौधा हर जगह देखने को मिल जाता है लेकिन इसके उपयोग की जानकारी कम लोगो को है हम आपको इसके प्रयोग की जानकारी दे रहे है .
* आक का पौधा दो प्रकार का होता है एक सफ़ेद और नीला .
* आक की जड को पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग अच्छा हो जाता है.
* आक की जड छाया में सुखा कर पीस लेवे और उसमें गुड मिलाकर खाने से शीत ज्वर शाँत हो जाता है.
* आक की जड 2 सेर लेकर उसको चार सेर पानी में पकावे जब आधा पानी रह जाय तब जड निकाल ले और पानी में 2 सेर गेहूँ छोडे जब जल नहीं रहे तब सुखा कर उन गेहूँओं का आटा पिसकर पावभर आटा की बाटी या रोटी बनाकर उसमें गुड और घी मिलाकर प्रतिदिन खाने से गठिया बाद दूर होती है. बहुत दिन की गठिया 21 दिन में अच्छी हो जाती है.
* आक की जड के चूर्ण में काली मिर्च पिस कर मिलावे और रत्ती -रत्ती भर की गोलियाँ बनाये इन गोलियों को खाने से खाँसी दूर होती है.
* आक की जड पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग जाता रहता है.
* आक की जड के छाल के चूर्ण में अदरक का अर्क और काली मिर्च पीसकर मिलावे और 2-2 रत्ती भर की गोलियाँ बनावे इन गोलियों से हैजा रोग दूर होता है.
* आक की जड की राख में कडुआ तेल मिलाकर लगाने से खुजली अच्छी हो जाती है.
* आक की सूखी डँडी लेकर उसे एक तरफ से जलावे और दूसरी ओर से नाक द्वारा उसका धूँआ जोर से खींचे शिर का दर्द तुरंत अच्छा हो जाता है.
* आक का पत्ता और ड्ण्ठल पानी में डाल रखे उसी पानी से आबद्स्त ले तो बवासीर अच्छी हो जाती है.
* आक की जड का चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करने से उपदंश (गर्मी) रोग अच्छा हो जाता है. उपदंश के घाव पर भी आक का चूर्ण छिडकना चाहिये. आक ही के काडे से घाव धोवे.
* आक की जड के लेप से बिगडा हुआ फोडा अच्छा हो जाता है.
* आक की जड की चूर्ण 1 माशा तक ठण्डे पानी के साथ खाने से प्लेग होने का भय नहीं रहता.
* आक की जड का चूर्ण दही के साथ खाने से स्त्री के प्रदर रोग दूर होता है.
* आक की जड का चूर्ण 1 तोला, पुराना गुड़ 4 तोला, दोनों की चने की बराबर गोली बनाकर खाने से कफ की खाँसी अच्छी हो जाती है.
* आक की जड पानी में घीस कर पिलाने से सर्प विष दूर होता है.
* आक की जड का धूँआ पीने से आतशक (सुजाक) रोग ठीक हो जाता है. इसमें बेसन की रोटी और घी खाना चाहिये. और नमक छोड देना चाहिये.
* आक की जड और पीपल की छाल का भष्म लगाने से नासूर अच्छा हो जाता है.
* आक की जड का चूर्ण का धूँआ पीकर उपर से बाद में दूध गुड पीने से श्वास बहुत जल्दी अच्छा हो जाता है.
* आक का दातून करने से दाँतों के रोग दूर होते हैं.
* आक की जड का चूर्ण 1 माशा तक खाने से शरीर का शोथ (सूजन) अच्छा हो जाता है.
* आक की जड 5 तोला, असगंध 5 तोला, बीजबंध 5 तोला, सबका चूर्ण कर गुलाब के जल में खरल कर सुखावे इस प्रकार 3 दिन गुलाब के अर्क में घोटे बाद में इसका 1 माशा चूर्ण शहद के साथ चाट कर उपर से दूध पीवे तो प्रमेह रोग जल्दी अच्छा हो जाता है.
* आक की जड की काडे में सुहागा भिगो कर आग पर फुला ले मात्रा 1 रत्ती 4 रत्ती तक यह 1 सेर दूध को पचा देता है. जिनको दूध नहीं पचता वे इसे सेवन कर दूध खूब हजम कर सकते हैं.
* आक की पत्ती और चौथाई सेंधा नमक एक में कूट कर हण्डी में रख कर कपरौटी आग में फूँक दे. बाद में निकाल कर चूर्ण कर शहद या पानी के साथ 1 माशा तक सेवन करने से खाँसी, दमा, प्लीहा रोग शाँत हो जाता है. आक का दूध लगाने से ऊँगलियों का सडना दूर होता है.
सफेद आक (आंकड़ा)। यह बहुत चमत्कारी पौधा है। यह सामान्य रूप से पाएं जाने वाले आक के पौधे से अलग होता है। इसका उपयोग की तांत्रिक क्रियाओं में किया जाता है। तांत्रिक प्रयोगों से बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जिस घर में यह लगा होता है उस घर किसी भी प्रकार के तंत्र-मंत्र या जादू-टोने का असर नहीं होता है।
* इस आक के पौधे से भी अधिक चमत्कारी है इससे निर्मित गणेश प्रतिमा। तंत्र शास्त्र में यह बताया गया है कि यदि सफेद आक से निर्मित गणेश प्रतिमा की विधिवत पूजा की जाए तो सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह गणेश प्रतिमा अद्भुत व चमत्कारी होता है। इसकी पूजा बहुत नियम और कायदों से करनी पड़ती है। नियम से पूजा ना होने पर इसका उचित लाभ नहीं मिल पाता है। इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में किसी तरह के तंत्र-मंत्र का असर ना हो तो ये पौधा घर में जरुर लगाएं। इसके अलावा सफेद आक की जड़ को भी तंत्र में बहुत उपयोगी माना जाता है।

कच्ची हल्दी के 10 सेहतमंद गुण

कच्ची हल्दी के 10 सेहतमंद गुण

हल्दी के खास गुणों से अमूमन हर कोई परिचित होता है।
भारतीय खाने की हल्दी के बिना कल्पना करना भी मुश्किलहै। हल्दी का उपयोग पाचन तंत्र को सुधारने में, सूजन कम करने मेंऔर शरीर के शोधन में हजारों सालों से उपयोग किया जा रहा है। इसमें पाया जाने वाले तत्व करक्यूमिनोइड्सऔर वोलाटाइल तेल कैंसर रोग से लड़ने के लिए भी जाने जाते हैं।सर्दियों के मौसम में हल्दी की गांठ का उपयोग सबसे अधिक
लाभदायक है और यह समय हल्दी से होने वाले फायदों को कई
गुना बढ़ा देता है क्योंकि कच्ची हल्दी में हल्दी पाउडर
की तुलना में ज्यादा गुण होते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कच्ची हल्दी के इस्तेमाल के दौरान निकलने वाला रंग हल्दी पाउडर की तुलना में काफी ज्यादा गाढ़ा और पक्का होता है।
कच्ची हल्दी, अदरक की तरह दिखाई देती है। इसे ज्यूस में डालकर, दूध में उबालकर, चावल के व्यंजनों में डालकर, अचार के तौर पर, चटनी बनाकर और सूप में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है।
1. कच्ची हल्दी में कैंसर से लड़ने के गुण होते हैं। यह खासतौर पर पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर के कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकने के साथ साथ उन्हें खत्म भी कर देती है। यह हानिकारक रेडिएशन
के संपर्क में आने से होने वाले ट्यूमर से भी बचाव करती है।
2. हल्दी में सूजन को रोकने का खास गुण होता है।
इसका उपयोग गठिया रोगियों को अत्यधिक लाभ
पहुंचाता है। यह शरीर के प्राकृतिक सेल्स को खत्म करने वाले फ्री रेडिकल्स को खत्म करती है और गठिया रोग में होने वाले जोडों के दर्द में लाभ पहुंचाती है।
3. कच्ची हल्दी में इंसुलिन के स्तर को संतुलित करने का गुण होता है। इस प्रकार यह मधुमेह रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होती है। इंसुलिन के अलावा यह ग्लूकोज को नियंत्रित करती है
जिससे मधुमेह के दौरान दी जाने वाली उपचार का असर बढ़ जाता है। परंतु अगर आप जो दवाइयां ले रहे हैं बहुत बढ़े हुए स्तर(हाई डोज) की हैं तो हल्दी के उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह अत्यंत आवश्यक है।
4. शोध से साबित हो चका है कि हल्दी में
लिपोपॉलीसेच्चाराइड नाम का तत्व होता है इससे शरीर में इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। हल्दी इस तरह से शरीर में बैक्टेरिया की समस्या से बचाव करती है। यह बुखार होने से रोकती है। इसमें शरीर को फंगल इंफेक्शन से बचाने के गुण होते है।
5. हल्दी के लगातार इस्तेमाल से कोलेस्ट्रोल सेरम का स्तर शरीर में कम बना रहता है। कोलेस्ट्रोल सेरम को नियंत्रित रखकर हल्दी शरीर को ह्रदय रोगों से सुरक्षित रखती है।
6. कच्ची हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी सेप्टिक गुण होते हैं। इसमें इंफेक्शन से लडने के गुण भी पाए जाते हैं। इसमें सोराइसिस जैसे त्वचा संबंधि रोगों से बचाव के गुण होते हैं।
7. हल्दी का उपयोग त्वचा को चमकदार और स्वस्थ रखने में बहुत कारगर है। इसके एंटीसेप्टीक गुण के कारण भारतीय संस्कृति में विवाह के पूर्व पूरे शरीर पर हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
8. कच्ची हल्दी से बनी चाय अत्यधिक लाभकारी पेय है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।
9. हल्दी में वजन कम करने का गुण पाया जाता है।
इसका नियमित उपयोग से वजन कम होने की गति बढ़ जाती है।
10. शोध से साबित होता है कि हल्दी लीवर को भी स्वस्थ रखती है। हल्दी के उपयोग से लीवर सुचारु रुप से काम करता रहता है।हल्दी विस्मयकारी गुणों से भरपूर है परंतु कुछ लोगों पर इसके
विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। जिन लोगों को हल्दी से
एलर्जी है उन्हें पेट में दर्द या डायरिया जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को कच्ची हल्दी के उपयोग से
पहले चिकित्सकीय सलाह ले लेनी चाहिए। इससे खून
का थक्का जमना भी प्रभावित हो सकता है जिससे रक्त
का बहाव बढ़ जाता है अत: अगर किसी की सर्जरी होने
वाली हो तो उन्हें कच्ची हल्दी का सेवन नहीं करना चाहिए।

माइग्रेन के दर्द से बचने के लिए

माइग्रेन के दर्द से बचने के लिए

 दालचीनी को पानी के साथ
बारीक पीस ले और इस लेप माथे पर लेप लगाएं। जब यह लेप सूख
जाए तो हटा लें। कुछ ही देर में आपको माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी।
सिर दर्द होने पर बिस्तर पर लेट कर दर्द वाले हिस्से को बेड के
नीचे लटकाएं। सिर के जिस हिस्से में दर्द हो, उस तरफ
वाली नाक में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें, फिर जोर से सांस
ऊपर की ओर खीचें। इससे सिर दर्द में राहत मिलेगी।

स्वाइन फ्लू में रामबाण गिलोय

स्वाइन फ्लू में रामबाण गिलोय

स्वाइन फ्लू के इलाज में गिलोय काफी कारगर है.
गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम
टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है. इसके खास
गुणों के कारण इसे अमृत के समान समझा जाता है और
इसी कारण इसे अमृता भी कहा जाता है.
प्राचीन काल से
ही इसकी पत्तियों का उपयोग विभिन्न
आयुर्वेदिक दवाइयों में किया जाता है. गिलोय
की पत्तियों और तनों से सत्व निकालकर इस्तेमाल में
लाया जाता है. गिलोय को आयुर्वेद में गर्म तासीर
का माना जाता है. यह तैलीय होने के साथ-साथ स्वाद
में कड़वा और हल्की झनझनाहट लाने
वाला होता है. गिलोय गुणों की खान है.

लो ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिए साधारण घरेलू नुस्खे...

लो ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिए साधारण घरेलू नुस्खे...

यदि आपको अक्सर कमजोरी और थकान महसूस होती है तो हो सकता है, आप लो ब्लड प्रेशर के शिकार हों। बहुत अधिक कमजोरी या पोषक तत्वों की कमी से भी कई बार यह समस्या पैदा हो जाती है। चक्कर, सुस्ती, काम में मन न लगना, सारे शरीर में दर्द आदि लो ब्लड प्रेशर के प्रमुख लक्षण होते हैं, लेकिन ऐसे लोग जब डाॅक्टरों के पास चेकअप के लिए आते हैं, तो सामान्य लगते हैं। कई बार यह लक्षण मानसिक तनाव का कारण भी बन जाते हैं। यदि आप भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे जो लो ब्लड प्रेशर को तुरंत कंट्रोल कर देंगे...
1. 50 ग्राम देशी चने व 10 ग्राम किशमिश को रात में 100 ग्राम पानी में किसी भी कांच के बर्तन में रख दें। सुबह चनों को किशमिश के साथ अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं और पानी को पी लें। यदि देशी चने न मिल पाएं तो सिर्फ किशमिश ही लें।
2. रात को बादाम की 3-4 गिरी पानी में भिगो दें। सुबह उनका छिलका उतारकर कर 15 ग्राम मक्खन और मिश्री के साथ मिलाकर खाने से ब्लड प्रेशर लो नहीं होता है।
3. छाछ में नमक, भुना हुआ जीरा व थोड़ी सी भुनी हुई हींग मिलाकर रोजाना पीने से ब्लड प्रेशर लो नहीं होता है।
4. टमाटर के रस में थोड़ी सी काली मिर्च व नमक मिलाकर पीने से तुरंत लाभ होता है।
5. हाई ब्लडप्रेशर में जहां नमक के सेवन से रोगी को हानि होती है, वहीं लो ब्लड प्रेशर के रोगियों को नमक के सेवन से लाभ होता है।
6. गाजर के 200 ग्राम रस में पालक का 50 ग्राम रस मिलाकर पीना भी लो ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए लाभदायक रहता है।
7. आंवले या सेब के मुरब्बे का सेवन लो ब्लड प्रेशर में बहुत उपयोगी होता है।
8. आंवले के 2 ग्राम रस में 10 ग्राम शहद मिलाकर कुछ दिन सुबह सेवन करने से लो ब्लड प्रेशर दूर करने में मदद मिलती है।
9. लो ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने में चुकंदर रस काफी कारगर होता है। रोजाना यह जूस सुबह-शाम पीना चाहिए। इससे लो ब्लड प्रेशर की समस्या खत्म हो जाती है।
10. जटामानसी, कपूर और दालचीनी को बराबर मात्रा में लेकर मिश्रण बना लें। तीन ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम गुनगुने पानी से सेवन करें। कुछ ही दिनों में लो ब्लड प्रेशर की समस्या खत्म हो जाएगी।
11. लो ब्लड प्रेशर की शिकायत हो और चक्कर आते हों तो आंवलें के रस में शहद मिलाकर लेने से जल्दी आराम मिलता है।
12. रात को सोने से पहले छुहारे का दूध बनाकर पीने से लो ब्लड प्रेशर की समस्या से मुक्ति मिल जाती है।
13. अदरक के बारीक कटे हुए टुकडों में नींबू का रस व सेंधा नमक मिलाकर रख लें। इसे भोजन से पहले थोड़ी- थोड़ी मात्रा में बार- बार खाते रहने से यह रोग दूर होता है।

अमरूद है एक बेहतरीन औषधि, इन रोगों में करता है दवा का काम

अमरूद है एक बेहतरीन औषधि, इन रोगों में करता है दवा का काम

अमरूद बेहतरीन गुणों से भरपूर स्वादिष्ट फल है। इसमें प्रोटीन 10.5 प्रतिशत, वसा 0. 2 प्रतिशत, कैल्शियम 1.01 प्रतिशत, विटामिन बी 0.2 प्रतिशत पाया जाता है। अमरूद के फलों में आंवला और चेरी के बाद सबसे ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। विटामिन सी इसके छिलके में और उसके ठीक नीचे होता है। इसके बाद गुदे में इसकी मात्रा घटती जाती है। फल के पकने के साथ-साथ यह मात्रा बढ़ती जाती है। अमरूद में मुख्य रूप से सिट्रिक अम्ल पाया जाता है। जिसकी 6 से 12 प्रतिशत मात्रा इसके बीज वाले भाग में होती है। इसके अलावा भी अमरूद में कई गुण पाए जाते हैं आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही गुणों के बारे में....
1. 10 ग्राम अमरूद के ताजे पत्तों के रस में 10 ग्राम पिसी मिश्री मिलाकर। 21 दिन तक खाली पेट लेने से भूख खुलकर लगती है और शरीर की सुंदरता में भी बढ़ोतरी होती है।
2. अमरूद खाने या अमरूद के पत्तों का रस पिलाने से शराब का नशा कम हो जाता है। कच्चे अमरूद को पत्थर पर घिसकर उसका एक सप्ताह तक लेप करने से आधा सिर दर्द खत्म हो जाता है। यह उपाय सुबह सूर्योदय से पहले करना चाहिए।
3. गठिया के दर्द को सही करने के लिए अमरूद की 4-5 नई कोमल पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर ख्राना चाहिए। इससे काफी राहत मिलती है।

पेट की प्रॉब्लम्स में पक्की दवा है अजवायन का ये नुस्खा

एक्जिमा व पेट की प्रॉब्लम्स में पक्की दवा है अजवायन का ये नुस्खा

भोजन में अजवायन का काफी इस्तेमाल किया जाता है। इसमें सेहत के अनोखे गुण छिपे होते हैं। कई लोग तो इसका पाउडर भी बनाकर रखते हैं, जो खाना खाने के बाद लिया जाता है। इससे हाजमा ठीक रहता है।सिर्फ अजवायन का पाउडर ही नहीं इसका पानी भी औषधि की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक असरदार देसी दवाई है, जो बीमारियों और दूर करने में लाभकारी है। यदि किसी को पेट से जुड़ी समस्या से तुरंत छुटकारा चाहिए तो अजवायन का पानी एक बेहतरीन दवा की तरह काम करता है। अजवायन का पानी हर उम्र के लोग ले सकते हैं। इसका कोई साइड इफैक्ट नहीं होता है। इसे बनाने की विधि बहुत आसान है। आइए जानते हैं कैसे बनाएं अजवायन का पानी…
विधि
एक कप पानी में एक चम्मच अजवायन डालें। इस पानी को तब तक उबालें जब तक कि वो आधा न हो जाए। यह पानी देखने में भूरे रंग का लगता है। इसे गिलास में छानें और जब यह पीने लायक ठंडा हो जाए तब इसे तुरंत ही पी जाएं।
1. खराब डायजेशन से छुटकारा
यदि आपको डायजेशन से जुड़ी कोई भी प्रॉब्लम जैसे कब्ज, गैस या एसिडिटी परेशान कर रही हो तो अजवायन का पानी पिएं। इस पानी को पीने से डायजेशन ठीक से होता है, क्योंकि यह ज्यादा डायजेस्टिव एंजाइम का उत्पादन करता है। पेट की गैस व दर्द की समस्या भी यह तुरंत ठीक कर सकता है।

जानिए राई के 10 औषधीय गुण

जानिए राई के 10 औषधीय गुण

अचार बनाने और सब्जी में तड़का लगाने के काम में आने वाली राई, आपकी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है। राई के छोटे-छोटे दानों में आपकी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का हल छुपा हुआ है। अगर आप अब तक नहीं जानते, राई के अनमोल फायदे, तो जरूर पढ़ें-
1 अगर आपको लगता है, कि आपका हृदय शिथिल हो रहा है, और घबराहट के साथ आप बेचैनी और कंपन महसूस कर रहे हैं, तो अपने हाथों और पैरों में राई को पीसकर मलना, आपको आराम दिलाने में मदद करेगा।
2 राई में मौजूद मायरोसीन, सिनिग्रिन जैसे रसायन त्वचा के रोगों के लिए बहुत फायदेमंद है। राई को रातभर पानी में भिगोकर सुबह इस पानी को त्वचा पर लगाने से त्वचा की कई तरह की समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।
3 कई बार बुखार आने के साथ ही जीभ पर सफेद परत जम जाती है, और भूख व प्यास धीरे-धीरे कम होने लगती है। इस तरह का बुखार होने पर सुबह के समय 4-5 ग्राम राईं के चूर्ण को शहद के साथ लेने से कफ के कारण होने वाला यह बुखार ठीक हो जाता है।
4 शरीर के किसी स्थान पर कांच या कांटा चुभ जाने की स्थिति में राई को शहद में मिलाकर प्रभावित स्थान पर लेप करने से कांच या कांटा वह त्वचा के अंदर से अपने आप बाहर निकल आता है।
5 कुष्ठ रोग हो जाने पर पिसा हुआ राई का आटा 8 गुना गाय के पुराने घी में मिलाकर प्रभावित स्थान पर कुछ दिनों तक लेप करने से रोग ठीक होने लगता है।
6 राई के घोल को सिर पर लगाने से सर के फोड़े, फुंसी ठीक होते हैं। इसके अलावा बालों का झड़ना और डैंड्रफ जैसी समस्याओं में भी यह फायदेमंद होता है।
7 राई को पीसकर उसमें कपूर मिलाकर जोड़ों पर मालिश करने से आमवात और जोड़ों के दर्द में फायदा होता है। कुछ इलाकों में मिट्टी का तेल मिलाकर भी इस लेप का प्रयोग किया जाता है।
8 कान में दर्द होने पर राई के तेल को गर्म कर दो से तीन बूंद कान में डालने पर दर्द में आराम होता है। कई बार बहरेपन के इलाज के तौर पर भी इसे काम में लिया जाता है।
9 धूम्रपान से होंठ काले हो जाने पर अकरकरा और राई को समान मात्रा पीसकर दिन में तीन चार बार लगाने से कुछ ही दिनों में होठों का रंग सामान्य हो जाता है।
10 आधे सिर का दर्द होने की समस्या में राई को बारीक पीसकर दर्द वाले हिस्से पर लगाने से आधे सिर का दर्द या माईग्रेन में तुरंत आराम मिलता है।

टांगों में दर्द को दूर करने में बहुत कारगर हैं ये घरेलू उपाय

टांगों में दर्द को दूर करने में बहुत कारगर हैं ये घरेलू उपाय

टांगों में दर्द होना एक आम समस्या है और उम्र के साथ यह बढ़ती ही जाती है. जरूरी नहीं है कि दोनों ही टांगों में दर्द हो. ऐसा भी हो सकता है कि एक ही टांग में या फिर टांग के किसी एक हिस्से में दर्द हो.
कई बार तो टांग दर्द बर्दाश्त हो जाता है लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि यह इतना तेज होता है कि बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कोई भी काम करना चुनौती बन जाता है. इसके अलावा कई बार टांगों में कमजोरी हो जाती है और कई बार ये सुन्न पड़ जाती हैं.
टांग दर्द के कई कारण हो सकते हैं. कई बार ऐंठन के चलते, मांस-पेशियों में अकड़ के कारण, मांस-पेशियों के एक के ऊपर एक चढ़ जाने के कारण, पोषण की कमी के कारण, शरीर में पानी की कमी के चलते या लंबे वक्त तक एक ही मुद्रा में रहने की वजह से टांगों में दर्द हो जाता है.
अगर दर्द हल्का है तो वो खुद ब खुद कुछ घंटों में दूर हो जाएगा. पर दर्द बहुत तेज है और आराम करने के बावजूद बढ़ता ही जा रहा है
तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. हो सकता है कि यह किसी भयंकर बीमारी की चेतावनी हो.
पैर दर्द में राहत पाने के लिए आप इन पांच घरेलू उपायों को आजमा सकते हैं:
1. बर्फ से सिकाई
अगर बहुत अधिक दौड़-भाग करने से आपकी टांगों में दर्द है तो ठंडी पट्टी का इस्तेमाल करना आपके लिए फायदेमंद होगा. ऐसा करने से दर्द तो कम होगा ही, साथ ही अगर सूजन और झनझनाहट है तो उसमें भी फायदा मिलेगा. इसके लिए आप एक पतले कपड़े में बर्फ के कुछ टुकड़ों को डालकर प्रभावित जगह पर 10 से 15 मिनट तक सिकाई करें. दिन में दो से तीन बार ऐसा करना जल्दी फायदा पहुंचाएगा.
2. मसाज करने से
अगर आपकी मांस-पेशियों में किसी तरह की तकलीफ है और वही दर्द की वजह है तो मसाज करना फायदेमंद रहेगा. आप चाहें तो मसाज करने के लिए ऑलिव ऑयल या नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं.
दिन में दो से तीन बार मसाज करना फायदेमंद होगा.
3. हल्दी के इस्तेमाल से
टांगों की दर्द से छुटकारा पाने के लिए हल्दी का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद होता है. हल्दी में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण पाया जाता है. हल्दी में मिलने वाला करक्यूमिन नाम का यौगिक दर्द को कम करने में बहुत फायदेमंद होता है.
4. नमक के पानी का इस्तेमाल
रोड़ा नमक (सेंधा नमक) में मैग्नीशियम पाया जाता है. यह तत्व नर्वस सिग्नल्स को नियंत्रित करके मांस-पेशियों को प्राकृतिक रूप से आराम पहुंचाने का काम करता है. साथ ही यह सूजन को भी कम करने में सहायक होता है.
5. अदरक का इस्तेमाल
अदरक में एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण पाया जाता है. यह सूजन और दर्द को कम करने का काम करती है. यह ब्लड-सर्कुलेशन को बढ़ाती है, जिससे मांस-पेशियों को राहत मिलती है.

गिलोय रस के फायदे

गिलोय रस के फायदे

गिलोय के पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं। गिलोय इतनी गुणकारी है कि इसका नाम अमृता रखा गया है। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जाने इस स्लाइड शो में।
1.गिलोय के स्वास्थ्य लाभ
गिलोय के पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं। गिलोय इतनी गुणकारी है कि इसका नाम अमृता रखा गया है। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। यह वात, कफ और पित्तनाशक होती है। गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही इसमें एंटीबायोटिक और एंटीवायरल तत्व भी होते है।
2. खून की कमी दूर करें
गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और शरीर में खून की कमी को दूर करता है। इसके लिए प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी या शहद मिलाकर सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है।
3.पीलिया में फायदेमंद
गिलोय का सेवन पीलिया रोग में भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय का एक चम्मच चूर्ण, काली मिर्च अथवा त्रिफला का एक चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ होता है। या गिलोय के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। एक चम्मच रस को एक गिलास मट्ठे में मिलाकर सुबह-सुबह पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।
4.जलन दूर करें
अगर आपके पैरों में जलन होती है और बहुत उपाय करने के बाद भी आपको कोई फायदा नहीं हो रहा है तो आप गिलोय का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए गिलोय के रस को नीम के पत्ते एवं आंवला के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। प्रतिदिन 2 से 3 बार इस काढ़े का सेवन करें इससे हाथ पैरों और शरीर की जलन दूर हो जाती है।
5.कान दर्द में लाभकारी
गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है। साथ ही गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके दोनों कानों में दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है।
6.उल्टियां में फायदेमंद
गर्मियों में कई लोगों को उल्टी की समस्या होती हैं। ऐसे लोगों के लिए भी गिलोय बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय के रस में मिश्री या शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से गर्मी के कारण से आ रही उल्टी रूक जाती है।
7.पेट के रोगों में लाभकारी
गिलोय के रस या गिलोय के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से पेट से संबंधित सभी रोग ठीक हो जाते है। इसके साथ ही आप गिलोय और शतावरी को साथ पीस कर एक गिलास पानी में मिलाकर पकाएं। जब उबाल कर काढ़ा आधा रह जाये तो इस काढ़े को सुबह-शाम पीयें।
8.आंखों के लिए फायदेमंद
गिलोय का रस आंवले के रस के साथ मिलाकर लेना आंखों के रोगों के लिए लाभकारी होता है। इसके सेवन से आंखों के रोगों तो दूर होते ही है, साथ ही आंखों की रोशनी भी बढ़ती हैं। इसके लिए गिलोय के रस में त्रिफला को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में पीपल का चूर्ण और शहद मिलकर सुबह-शाम सेवन करें।
11. मोटापा कम करें
गिलोय मोटापा कम करने में भी मदद करता है। मोटापा कम करने के लिए गिलोय और त्रिफला चूर्ण को सुबह और शाम शहद के साथ लें। या गिलोय, हरड़, बहेड़ा, और आंवला मिला कर काढ़ा बनाकर इसमें शिलाजीत मिलाकर पकाएं और सेवन करें। इस का नियमित सेवन से मोटापा रुक जाता है।