11.8.16

सुगर ठीक करने का देशी नूकता


सुगर ठीक करने का देशी नूकता

आक, आकड़ा, मदार पौधे की पत्ती
एक सप्ताह में आपका " सुगर " सामान्य् हो जायेगा !

यह "अकबन,आक, आकड़ा, मदार है !
इस पौधे की पत्ती को उल्टा ( उल्टा का मतलब पत्ते का खुदरा भाग )
कर के पैर के तलवे से सटा कर मोजा पहन लें !
सुबह और पूरा दिन रहने दे रात में सोते समय निकाल दें !
एक सप्ताह में आपका " सुगर " सामान्य् हो जायेगा !
बाहर निकला पेट भी कम हो जाता है !
ये पेड़ हर जगह मिलता है और इसकी कई जातीय है जो भी मिले लेले
और हा एक बात पर धयान दे इसका दूध आँख में ना जाये नहीं तो आप की आखे खराब हो सकती है
और २ पत्ते से जड़ा ना ले ये अनमोल पेड़ है
काफी लोग इस ऱ्पयोग से लाभान्वित हो रहे हैं ! आप भी स्वास्थ़्य लाभ लें !!

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30.7.16

उड़द की दाल के 6 फायदे

उड़द की दाल के 6 फायदे

1. उड़द की दाल से बना लड्डू सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यहां तक की इसमें बूढों को नौजवान करने की भी क्षमता होती है।
2. उड़द की दाल शरीर में खून के प्रवाह को भी दुरुस्त रखती है।
3. अगर आप पतले हैं तो उड़द की दाल का बना लड्डू खाइए। इससे आपका वजन बढ़ जाएगा।
4. उड़द की दाल दिल के रोगों से भी बचाती है। इसमें मैग्नीशियम पाया जाता है,
जो दिल के बहुत लाभदायक होता है। इससे बने लड्डू खाइए तो दिल स्वस्थ रहेगा।
5. शरीर पर फोड़े और फुंसियां होने पर उड़द के आटे को पट्टी में डालकर बांध लें। जादुई तरीके से फुंसियां गायब हो जाएंगी।
6. उड़द की दाल को एक छोटी पोटली में बांध लें। इसे तवे पर गर्म करके जोड़ों को सेकने से जोड़ों के दर्द से निजाद मिलेगा।

24.6.16

नेत्र – ज्योतिवर्धक (चश्मा छुड़ानें के लिए) उपचार,

नेत्र – ज्योतिवर्धक (चश्मा छुड़ानें के लिए) उपचार, उपाय और विकल्प –

बादाम-गिरी, सौंफ़ (बड़ी) स्वच्छ की हुई, मिश्री कूजा तीनों को बराबर-बराबर लेकर कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर किसी काँच के बर्तन में रख लें। प्रतिदिन रात में सोते समय 10 ग्राम की मात्रा में 250 ग्राम दूध के साथ चालीस दिन तक निरन्तर लेते रहनें से दृष्टि इतनी तेज़ हो जाती है कि चश्में की आवश्यकता ही नहीं रहती। इसके अतिरिक्त इससे दिमाग़ी कमज़ोरी, दिमाग की गर्मी, दिमाग़ी फ़ितूर और बातों को भूल जानें की बिमारी भी दूर हो जाती है।

विशेष –

बच्चों को आधी मात्रा दें। पूर्ण लाभ के लिए दवा के सेवन के दो घंटे बाद तक पानी न पियें। आँखों की रौशनी के साथ-साथ याद्दाश्त भी बढ़ेगी।
कूजा मिश्री न मिले तो साधारण मिश्री का प्रयोग भी कर सकते हैं। कूजा मिश्री मिट्टी के बर्तन या कूजे की सहायता से एक विशेष विधि से बनाई जाती है। यह अधिक शीतल मानी जाती है।
सहायक उपचार –

सुबह उठते ही मुँह में ठंडा पानी भरकर मुँह फुलाकर ठन्डे पानी से आँखों पर छींटे लगाने चाहिए। ऐसा दिन में तीन बार करें।
त्रिफला जल से आँखें धोना – आँवला, हरड़ और बहेड़ा (गुठली सहित) सामान मात्रा में लेकर उन्हें यवकूट (थोड़ा-सा कूटकर) कर लें और किसी शीशी में भरकर रखकर रख लें। प्रतिदिन शाम को इसमें से 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण को कोरे मिट्टी या शीशे के पात्र में एक गिलास पानी (200 ग्राम) में भिगो दें। सुबह इसको मसलकर छान लें। फ़िर इसके निथरे हुए पानी से हल्के हाथ से नेत्रों में खूब छींटे लगाकर धो लिया करे। इससे न केवल आँखों की रौशनी की रक्षा की जाती है बल्कि नज़र तेज़ होती है तथा आँखों की अनेक बीमारियाँ ठीक होती है।
पैर के तलवों में सरसों के तेल की प्रतिदिन मालिश करने और नहाने से पहले पैर के अंगूठे तेल से तर करने से नेत्र-ज्योति बढ़ती है तथा आँखों के रोग नहीं होने पाते।
गाजर, टमाटर का सेवन करें। दिन में दो बार आधा गिलास की मात्रा में गाजर का रस दो-तीन महीनों तक पीए। 

13.5.16

डाइबिटीज में आजमाएं देसी उपाय

डाइबिटीज में आजमाएं, बस 2 देसी उपाय

क्या आपको डाइबिटीज है ? अगर आप डाइबिटीज रोगी हैं तो हम बता रहे हैं आपके लिए ऐसे 2 आसान और प्रभावी नुस्खे जि‍न्हें वैज्ञानिक तौर पर अति कारगर साबित किया जा चुका है। इसके लिए आपको अपने पुराने इलाज को प्रभावित करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आप इसे उसके साथ भी आजमा सकते हैं। यकीन मानिए, अत्यंत कारगर है यह उपाय...  

1. एक चम्मच अलसी के बीजों को अच्छी तरह से चबाकर खाइए और दो गिलास पानी पीजिए। ऐसा प्रतिदिन सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले करना है। 
2. दालचीनी की छाल का चूर्ण तैयार कर लीजिए और आधा चम्मच चूर्ण एक कप पानी में मिला लीजिए और इस मिश्रण को दोपहर और रात खाना खाने से पहले प्रतिदिन लीजिए। 
इन दोनों नुस्खों की शुरुआत करने से पहले अपने इंसुलिन लेवल की जांच अवश्य करें ताकि एक पन्द्रह दिनों बाद जब पुन: जांच की जाए तो फर्क दिखाई दें। 
पादप विज्ञान जगत के अनेक शोध पत्रों में इन फार्मुलों से गजब के परिणामों का दावा किया गया है, आदिवासी हर्बल जानकार तो इन फार्मुलों को सैकड़ों सालों से लोगों पर आजमा रहे हैं।

18.4.16

गर्दन का कालापन दूर करने के लिये अपनाएं ये घरेलू नुस्खे

गर्दन का कालापन दूर करने के लिये अपनाएं ये घरेलू नुस्खे

नींबू और गुलाबजल
नींबू और गुलाबजल का 1 चम्मच लें और मिलाएं। फिर इस घोल को रूई की मदद से काली गर्दन पर लगाएं और रातभर के लिये छोड़ दें। यह तरीका हर तहर की त्वचा पर आजमाया जा सकता है।

नींबू और शहद
ताजा नींबू और शुद्ध शहद ले कर मिलांए और गर्दन पर लगाएं। 20-25 मिनट तक छोड़ दें और बाद में हल्के गरम पानी से धो लें। इस विधि से आपकी गर्दन साफ हो जाएगी।

3.2.16

जोड़ों के दर्द से छुटकारा

एपल -साइडर-विनेगर :
एपल -साइडर-विनेगर पके हुए सेबों का सिरका होता है। इसमें कई मिनरल, मेलिक एसिड, असेटिक -एसिड, और कई प्रकार के आर्गेनिक तत्व होते हैं। आर्थराइटिस के लिए जिम्मेदार एसिड जोड़ों के बीच में अंडे के छिलके के सामान कठोर एसिड-क्रिस्टल के रूप में होते है। एपल -साइडर-विनेगर इन एसिड क्रिस्टल्स को गला देते हैं जो ,खून के जरिये किडनी में पहुँच कर यूरिनरी सिस्टम के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
प्रयोग -विधि :
प्रतिदिन सुबह 100 मिली . हलके गुनगुने पानी में
एक छोटा चम्मच [लगभग 5 मिली .] शहद और लगभग
10 मिली . एपल -साइडर-विनेगर डाल कर पिए। शुरू -शुरू में थोड़ी मिचली या उलटी जैसा लग सकता है लेकिन चिंता न करें।
इस प्रयोग के अतिरिक्त निम्न उपाय करने से जोड़ों की तकलीफ में तीब्रता से आराम मिलेगा :
1. सर्वप्रथम अपना वजन घटाने की कोशिश करें । एपल -साइडर-विनेगर वजन को भी प्रभावशाली रूप से नियंत्रित रखता है।
2. ताज़ी हवा में टहलने की आदत डालें ।
3. ताज़े फल और सब्जी खाएं, यथासंभव मांसाहार से दूर रहे।
4. एसिड फ्री या क्षार -युक्त भोजन करें |
5. हफ्ते में कम से कम दो बार एप्सम -साल्ट [magnesium sulphate] गुनगुने पानी में डाल कर नहाएं।
आप इन सभी उपायों को अपना कर आजीवन जोड़ों के दर्द से छुटकारा पा सकतें है।

30.1.16

नीम का तेल कई मामले में बालों के लिए है फायदेमंद


नीम का तेल कई मामले में बालों के लिए है फायदेमंद

बाल झड़ने, डैंड्रफ जैसी समस्याओं से परेशान हैं तो नीम के तेल के इस्तेमाल से आपको फायदा मिल सकता है।
आयुर्वेद से लेकर एलोपैथ तक, नीम की जड़ से लेकर तने, छाल,पत्तियों, फल और तेल, नीम का सबकुछ फायदेमंद है।नीम के हैं ये गुण
नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल, एंटी पैरासिटिक गुणों के अलावा, विटामिन सी, प्रोटीन और कैरोटीन प्रचुर मात्रा में है जो न केवल बालों को संक्रमण से मुक्त रखता है और जुएं जैसी समस्याओं से बचाता है बल्कि बालों को लंबे समय तक घना और काला बनाए रखने में मदद करता है।ऐसे करें इस्तेमाल
नीम का तेल लगाने का सही तरीका इस तरह है। पहले नीं के तेल को हल्का गर्म कर लें।
इससे स्काल्प की मसाज करें। इससे कम से कम एक घंटा और अधिकतम रात भर लगाकर छोड़ें।
इसके बाद शैंपू से बाल अच्छी तरह साफ करें। हफ्ते में कम से कम एक बार यह उपाय करें।

आकडे (आक या मदार ) के ये है फायदे..... !

आकडे (आक या मदार ) के ये है फायदे..... !

* सर्व सुलभ है ये पौधा हर जगह देखने को मिल जाता है लेकिन इसके उपयोग की जानकारी कम लोगो को है हम आपको इसके प्रयोग की जानकारी दे रहे है .
* आक का पौधा दो प्रकार का होता है एक सफ़ेद और नीला .
* आक की जड को पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग अच्छा हो जाता है.
* आक की जड छाया में सुखा कर पीस लेवे और उसमें गुड मिलाकर खाने से शीत ज्वर शाँत हो जाता है.
* आक की जड 2 सेर लेकर उसको चार सेर पानी में पकावे जब आधा पानी रह जाय तब जड निकाल ले और पानी में 2 सेर गेहूँ छोडे जब जल नहीं रहे तब सुखा कर उन गेहूँओं का आटा पिसकर पावभर आटा की बाटी या रोटी बनाकर उसमें गुड और घी मिलाकर प्रतिदिन खाने से गठिया बाद दूर होती है. बहुत दिन की गठिया 21 दिन में अच्छी हो जाती है.
* आक की जड के चूर्ण में काली मिर्च पिस कर मिलावे और रत्ती -रत्ती भर की गोलियाँ बनाये इन गोलियों को खाने से खाँसी दूर होती है.
* आक की जड पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग जाता रहता है.
* आक की जड के छाल के चूर्ण में अदरक का अर्क और काली मिर्च पीसकर मिलावे और 2-2 रत्ती भर की गोलियाँ बनावे इन गोलियों से हैजा रोग दूर होता है.
* आक की जड की राख में कडुआ तेल मिलाकर लगाने से खुजली अच्छी हो जाती है.
* आक की सूखी डँडी लेकर उसे एक तरफ से जलावे और दूसरी ओर से नाक द्वारा उसका धूँआ जोर से खींचे शिर का दर्द तुरंत अच्छा हो जाता है.
* आक का पत्ता और ड्ण्ठल पानी में डाल रखे उसी पानी से आबद्स्त ले तो बवासीर अच्छी हो जाती है.
* आक की जड का चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करने से उपदंश (गर्मी) रोग अच्छा हो जाता है. उपदंश के घाव पर भी आक का चूर्ण छिडकना चाहिये. आक ही के काडे से घाव धोवे.
* आक की जड के लेप से बिगडा हुआ फोडा अच्छा हो जाता है.
* आक की जड की चूर्ण 1 माशा तक ठण्डे पानी के साथ खाने से प्लेग होने का भय नहीं रहता.
* आक की जड का चूर्ण दही के साथ खाने से स्त्री के प्रदर रोग दूर होता है.
* आक की जड का चूर्ण 1 तोला, पुराना गुड़ 4 तोला, दोनों की चने की बराबर गोली बनाकर खाने से कफ की खाँसी अच्छी हो जाती है.
* आक की जड पानी में घीस कर पिलाने से सर्प विष दूर होता है.
* आक की जड का धूँआ पीने से आतशक (सुजाक) रोग ठीक हो जाता है. इसमें बेसन की रोटी और घी खाना चाहिये. और नमक छोड देना चाहिये.
* आक की जड और पीपल की छाल का भष्म लगाने से नासूर अच्छा हो जाता है.
* आक की जड का चूर्ण का धूँआ पीकर उपर से बाद में दूध गुड पीने से श्वास बहुत जल्दी अच्छा हो जाता है.
* आक का दातून करने से दाँतों के रोग दूर होते हैं.
* आक की जड का चूर्ण 1 माशा तक खाने से शरीर का शोथ (सूजन) अच्छा हो जाता है.
* आक की जड 5 तोला, असगंध 5 तोला, बीजबंध 5 तोला, सबका चूर्ण कर गुलाब के जल में खरल कर सुखावे इस प्रकार 3 दिन गुलाब के अर्क में घोटे बाद में इसका 1 माशा चूर्ण शहद के साथ चाट कर उपर से दूध पीवे तो प्रमेह रोग जल्दी अच्छा हो जाता है.
* आक की जड की काडे में सुहागा भिगो कर आग पर फुला ले मात्रा 1 रत्ती 4 रत्ती तक यह 1 सेर दूध को पचा देता है. जिनको दूध नहीं पचता वे इसे सेवन कर दूध खूब हजम कर सकते हैं.
* आक की पत्ती और चौथाई सेंधा नमक एक में कूट कर हण्डी में रख कर कपरौटी आग में फूँक दे. बाद में निकाल कर चूर्ण कर शहद या पानी के साथ 1 माशा तक सेवन करने से खाँसी, दमा, प्लीहा रोग शाँत हो जाता है. आक का दूध लगाने से ऊँगलियों का सडना दूर होता है.
सफेद आक (आंकड़ा)। यह बहुत चमत्कारी पौधा है। यह सामान्य रूप से पाएं जाने वाले आक के पौधे से अलग होता है। इसका उपयोग की तांत्रिक क्रियाओं में किया जाता है। तांत्रिक प्रयोगों से बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जिस घर में यह लगा होता है उस घर किसी भी प्रकार के तंत्र-मंत्र या जादू-टोने का असर नहीं होता है।
* इस आक के पौधे से भी अधिक चमत्कारी है इससे निर्मित गणेश प्रतिमा। तंत्र शास्त्र में यह बताया गया है कि यदि सफेद आक से निर्मित गणेश प्रतिमा की विधिवत पूजा की जाए तो सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह गणेश प्रतिमा अद्भुत व चमत्कारी होता है। इसकी पूजा बहुत नियम और कायदों से करनी पड़ती है। नियम से पूजा ना होने पर इसका उचित लाभ नहीं मिल पाता है। इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में किसी तरह के तंत्र-मंत्र का असर ना हो तो ये पौधा घर में जरुर लगाएं। इसके अलावा सफेद आक की जड़ को भी तंत्र में बहुत उपयोगी माना जाता है।

कच्ची हल्दी के 10 सेहतमंद गुण

कच्ची हल्दी के 10 सेहतमंद गुण

हल्दी के खास गुणों से अमूमन हर कोई परिचित होता है।
भारतीय खाने की हल्दी के बिना कल्पना करना भी मुश्किलहै। हल्दी का उपयोग पाचन तंत्र को सुधारने में, सूजन कम करने मेंऔर शरीर के शोधन में हजारों सालों से उपयोग किया जा रहा है। इसमें पाया जाने वाले तत्व करक्यूमिनोइड्सऔर वोलाटाइल तेल कैंसर रोग से लड़ने के लिए भी जाने जाते हैं।सर्दियों के मौसम में हल्दी की गांठ का उपयोग सबसे अधिक
लाभदायक है और यह समय हल्दी से होने वाले फायदों को कई
गुना बढ़ा देता है क्योंकि कच्ची हल्दी में हल्दी पाउडर
की तुलना में ज्यादा गुण होते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कच्ची हल्दी के इस्तेमाल के दौरान निकलने वाला रंग हल्दी पाउडर की तुलना में काफी ज्यादा गाढ़ा और पक्का होता है।
कच्ची हल्दी, अदरक की तरह दिखाई देती है। इसे ज्यूस में डालकर, दूध में उबालकर, चावल के व्यंजनों में डालकर, अचार के तौर पर, चटनी बनाकर और सूप में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है।
1. कच्ची हल्दी में कैंसर से लड़ने के गुण होते हैं। यह खासतौर पर पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर के कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकने के साथ साथ उन्हें खत्म भी कर देती है। यह हानिकारक रेडिएशन
के संपर्क में आने से होने वाले ट्यूमर से भी बचाव करती है।
2. हल्दी में सूजन को रोकने का खास गुण होता है।
इसका उपयोग गठिया रोगियों को अत्यधिक लाभ
पहुंचाता है। यह शरीर के प्राकृतिक सेल्स को खत्म करने वाले फ्री रेडिकल्स को खत्म करती है और गठिया रोग में होने वाले जोडों के दर्द में लाभ पहुंचाती है।
3. कच्ची हल्दी में इंसुलिन के स्तर को संतुलित करने का गुण होता है। इस प्रकार यह मधुमेह रोगियों के लिए बहुत लाभदायक होती है। इंसुलिन के अलावा यह ग्लूकोज को नियंत्रित करती है
जिससे मधुमेह के दौरान दी जाने वाली उपचार का असर बढ़ जाता है। परंतु अगर आप जो दवाइयां ले रहे हैं बहुत बढ़े हुए स्तर(हाई डोज) की हैं तो हल्दी के उपयोग से पहले चिकित्सकीय सलाह अत्यंत आवश्यक है।
4. शोध से साबित हो चका है कि हल्दी में
लिपोपॉलीसेच्चाराइड नाम का तत्व होता है इससे शरीर में इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। हल्दी इस तरह से शरीर में बैक्टेरिया की समस्या से बचाव करती है। यह बुखार होने से रोकती है। इसमें शरीर को फंगल इंफेक्शन से बचाने के गुण होते है।
5. हल्दी के लगातार इस्तेमाल से कोलेस्ट्रोल सेरम का स्तर शरीर में कम बना रहता है। कोलेस्ट्रोल सेरम को नियंत्रित रखकर हल्दी शरीर को ह्रदय रोगों से सुरक्षित रखती है।
6. कच्ची हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी सेप्टिक गुण होते हैं। इसमें इंफेक्शन से लडने के गुण भी पाए जाते हैं। इसमें सोराइसिस जैसे त्वचा संबंधि रोगों से बचाव के गुण होते हैं।
7. हल्दी का उपयोग त्वचा को चमकदार और स्वस्थ रखने में बहुत कारगर है। इसके एंटीसेप्टीक गुण के कारण भारतीय संस्कृति में विवाह के पूर्व पूरे शरीर पर हल्दी का उबटन लगाया जाता है।
8. कच्ची हल्दी से बनी चाय अत्यधिक लाभकारी पेय है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।
9. हल्दी में वजन कम करने का गुण पाया जाता है।
इसका नियमित उपयोग से वजन कम होने की गति बढ़ जाती है।
10. शोध से साबित होता है कि हल्दी लीवर को भी स्वस्थ रखती है। हल्दी के उपयोग से लीवर सुचारु रुप से काम करता रहता है।हल्दी विस्मयकारी गुणों से भरपूर है परंतु कुछ लोगों पर इसके
विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। जिन लोगों को हल्दी से
एलर्जी है उन्हें पेट में दर्द या डायरिया जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। गर्भवती महिलाओं को कच्ची हल्दी के उपयोग से
पहले चिकित्सकीय सलाह ले लेनी चाहिए। इससे खून
का थक्का जमना भी प्रभावित हो सकता है जिससे रक्त
का बहाव बढ़ जाता है अत: अगर किसी की सर्जरी होने
वाली हो तो उन्हें कच्ची हल्दी का सेवन नहीं करना चाहिए।

माइग्रेन के दर्द से बचने के लिए

माइग्रेन के दर्द से बचने के लिए

 दालचीनी को पानी के साथ
बारीक पीस ले और इस लेप माथे पर लेप लगाएं। जब यह लेप सूख
जाए तो हटा लें। कुछ ही देर में आपको माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी।
सिर दर्द होने पर बिस्तर पर लेट कर दर्द वाले हिस्से को बेड के
नीचे लटकाएं। सिर के जिस हिस्से में दर्द हो, उस तरफ
वाली नाक में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें, फिर जोर से सांस
ऊपर की ओर खीचें। इससे सिर दर्द में राहत मिलेगी।

स्वाइन फ्लू में रामबाण गिलोय

स्वाइन फ्लू में रामबाण गिलोय

स्वाइन फ्लू के इलाज में गिलोय काफी कारगर है.
गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम
टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है. इसके खास
गुणों के कारण इसे अमृत के समान समझा जाता है और
इसी कारण इसे अमृता भी कहा जाता है.
प्राचीन काल से
ही इसकी पत्तियों का उपयोग विभिन्न
आयुर्वेदिक दवाइयों में किया जाता है. गिलोय
की पत्तियों और तनों से सत्व निकालकर इस्तेमाल में
लाया जाता है. गिलोय को आयुर्वेद में गर्म तासीर
का माना जाता है. यह तैलीय होने के साथ-साथ स्वाद
में कड़वा और हल्की झनझनाहट लाने
वाला होता है. गिलोय गुणों की खान है.

लो ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिए साधारण घरेलू नुस्खे...

लो ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिए साधारण घरेलू नुस्खे...

यदि आपको अक्सर कमजोरी और थकान महसूस होती है तो हो सकता है, आप लो ब्लड प्रेशर के शिकार हों। बहुत अधिक कमजोरी या पोषक तत्वों की कमी से भी कई बार यह समस्या पैदा हो जाती है। चक्कर, सुस्ती, काम में मन न लगना, सारे शरीर में दर्द आदि लो ब्लड प्रेशर के प्रमुख लक्षण होते हैं, लेकिन ऐसे लोग जब डाॅक्टरों के पास चेकअप के लिए आते हैं, तो सामान्य लगते हैं। कई बार यह लक्षण मानसिक तनाव का कारण भी बन जाते हैं। यदि आप भी लो ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे जो लो ब्लड प्रेशर को तुरंत कंट्रोल कर देंगे...
1. 50 ग्राम देशी चने व 10 ग्राम किशमिश को रात में 100 ग्राम पानी में किसी भी कांच के बर्तन में रख दें। सुबह चनों को किशमिश के साथ अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं और पानी को पी लें। यदि देशी चने न मिल पाएं तो सिर्फ किशमिश ही लें।
2. रात को बादाम की 3-4 गिरी पानी में भिगो दें। सुबह उनका छिलका उतारकर कर 15 ग्राम मक्खन और मिश्री के साथ मिलाकर खाने से ब्लड प्रेशर लो नहीं होता है।
3. छाछ में नमक, भुना हुआ जीरा व थोड़ी सी भुनी हुई हींग मिलाकर रोजाना पीने से ब्लड प्रेशर लो नहीं होता है।
4. टमाटर के रस में थोड़ी सी काली मिर्च व नमक मिलाकर पीने से तुरंत लाभ होता है।
5. हाई ब्लडप्रेशर में जहां नमक के सेवन से रोगी को हानि होती है, वहीं लो ब्लड प्रेशर के रोगियों को नमक के सेवन से लाभ होता है।
6. गाजर के 200 ग्राम रस में पालक का 50 ग्राम रस मिलाकर पीना भी लो ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए लाभदायक रहता है।
7. आंवले या सेब के मुरब्बे का सेवन लो ब्लड प्रेशर में बहुत उपयोगी होता है।
8. आंवले के 2 ग्राम रस में 10 ग्राम शहद मिलाकर कुछ दिन सुबह सेवन करने से लो ब्लड प्रेशर दूर करने में मदद मिलती है।
9. लो ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने में चुकंदर रस काफी कारगर होता है। रोजाना यह जूस सुबह-शाम पीना चाहिए। इससे लो ब्लड प्रेशर की समस्या खत्म हो जाती है।
10. जटामानसी, कपूर और दालचीनी को बराबर मात्रा में लेकर मिश्रण बना लें। तीन ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम गुनगुने पानी से सेवन करें। कुछ ही दिनों में लो ब्लड प्रेशर की समस्या खत्म हो जाएगी।
11. लो ब्लड प्रेशर की शिकायत हो और चक्कर आते हों तो आंवलें के रस में शहद मिलाकर लेने से जल्दी आराम मिलता है।
12. रात को सोने से पहले छुहारे का दूध बनाकर पीने से लो ब्लड प्रेशर की समस्या से मुक्ति मिल जाती है।
13. अदरक के बारीक कटे हुए टुकडों में नींबू का रस व सेंधा नमक मिलाकर रख लें। इसे भोजन से पहले थोड़ी- थोड़ी मात्रा में बार- बार खाते रहने से यह रोग दूर होता है।

अमरूद है एक बेहतरीन औषधि, इन रोगों में करता है दवा का काम

अमरूद है एक बेहतरीन औषधि, इन रोगों में करता है दवा का काम

अमरूद बेहतरीन गुणों से भरपूर स्वादिष्ट फल है। इसमें प्रोटीन 10.5 प्रतिशत, वसा 0. 2 प्रतिशत, कैल्शियम 1.01 प्रतिशत, विटामिन बी 0.2 प्रतिशत पाया जाता है। अमरूद के फलों में आंवला और चेरी के बाद सबसे ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। विटामिन सी इसके छिलके में और उसके ठीक नीचे होता है। इसके बाद गुदे में इसकी मात्रा घटती जाती है। फल के पकने के साथ-साथ यह मात्रा बढ़ती जाती है। अमरूद में मुख्य रूप से सिट्रिक अम्ल पाया जाता है। जिसकी 6 से 12 प्रतिशत मात्रा इसके बीज वाले भाग में होती है। इसके अलावा भी अमरूद में कई गुण पाए जाते हैं आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही गुणों के बारे में....
1. 10 ग्राम अमरूद के ताजे पत्तों के रस में 10 ग्राम पिसी मिश्री मिलाकर। 21 दिन तक खाली पेट लेने से भूख खुलकर लगती है और शरीर की सुंदरता में भी बढ़ोतरी होती है।
2. अमरूद खाने या अमरूद के पत्तों का रस पिलाने से शराब का नशा कम हो जाता है। कच्चे अमरूद को पत्थर पर घिसकर उसका एक सप्ताह तक लेप करने से आधा सिर दर्द खत्म हो जाता है। यह उपाय सुबह सूर्योदय से पहले करना चाहिए।
3. गठिया के दर्द को सही करने के लिए अमरूद की 4-5 नई कोमल पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर ख्राना चाहिए। इससे काफी राहत मिलती है।